ब्रेकिंग न्यूज़:नई दिल्ली से चुनाव आयोग मे दो आयुक्तों की असहमतियों की जो भी कहानी कही जा रही हो लेकिन सच्चाई यह है कि सभी मामलों में अंतिम फैसला सर्वसम्मति से ही लिया गया था।आयोग के सूत्रों की ओर से साक्ष्यों के साथ जो जानकारी दी गई है वह सारे विवाद को एक झटके में उड़ा सकता है।आयोग के सूत्रों ने तिथिवार और पेज व बिंदु संख्या के साथ हर मामले में बताया कि उन फैसलों में तीनों आयुक्त एकमत थे और उसमें कहा गया था कि नए वोटर या एक राज्य से दूसरे राज्य में वोटर बनने के लिए जरूरी फार्म 6 और फार्म 8 के साथ साथ घोषणापत्र भरना होगा।
सर्वसम्मति से हुआ था फैसला : सूत्र इतना ही नहीं 27 मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भी फार्म के साथ घोषणापत्र जोड़ने को अपनी स्वीकृति दे दी थी। जानकारी के अनुसार बिहार में हुए एसआईआर के संबंध में 24 जून 2025 को सर्वसम्मति से फैसला हुआ था और उसमें पेज नंबर 6 के बिंदु नंबर 15 में स्पष्ट उल्लिखित था कि उपर्युक्त दोनों मामलों में घोषणापत्र भरना होगा जिसमें माता पिता, दादा आदि से संबंधित जानकारी देनी होगी। दूसरा एसआईआर 12 राज्यों के लिए हुआ जिसपर फैसला 27.10.2025 को हुआ और वह भी सर्वसम्मत था।14 मई 2026 को 19 राज्यों में एसआइआर के लिए जब फैसला हुआ तो उसमें पेज नंबर 5 के बिंदु 4 पर यह उल्लिखित था कि घोषणापत्र भरना जरूरी होगा। इसमें भी फैसला बहुमत नहीं सर्वसम्मति से हुआ था।
क्या थम जाएगी विवाद की आंधी?आयोग के सूत्रों ने कहा कि घोषणापत्र किसी भी तरह से 1950 के रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट से नहीं टकराता है। बल्कि घोषणापत्र नए वोटरों की सुविधा के लिए है।अगर कोई यह घोषणापत्र देता है तो उसे अन्य दस्तावेज देने की जरूरत नहीं रह जाती है। यह सभी राज्यों में एक समान लागू किया गया है।आयोग के सूत्रों के इस साक्ष्य के बाद राजनीतिक विवाद की आंधी थमेगी या नहीं यह कहना मुश्किल है लेकिन विपक्ष की धार जरूर कुंद हो सकती है। गुरुवार को विपक्ष ने इस मुद्दे के सहारे बड़ा अभियान चलाने की तैयारी कर ली थी।
Post a Comment