ब्रेकिंग न्यूज़: शाजापुर जिला जिले से निकाल आ रही है सबसे बड़ी खबर नजेल को मिला नया मुखिया: उप अधीक्षक से अधीक्षक बने सुनील कुमार मंडलेकर जी नागर शाजापुर मध्य प्रदेश कारागार विभाग के लिए गर्व का क्षण। शाजापुर जिला जेल के उप अधीक्षक श्री सुनील कुमार मंडलेकर जी को वरिष्ठता, कार्यनिष्ठा और अनुकरणीय सेवाओं के आधार पर जेल अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस पदोन्नति के साथ ही शाजापुर जेल को न केवल एक कुशल प्रशासक मिला है, बल्कि बंदियों के लिए एक मार्गदर्शक, मित्र और अभिभावक भी मिला है। कारागार विभाग में 20 वर्षों से अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे श्री मंडलेकर जी का नाम अनुशासन, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के लिए पूरे संभाग में जाना जाता है। उप अधीक्षक के रूप में उन्होंने जिस तरह जेल की कार्यप्रणाली को बदला और बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए, उसी का परिणाम है कि आज उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।bकार्यशैली: कड़ाई के साथ करुणा जेल को अक्सर सिर्फ सजा की जगह माना जाता है, लेकिन श्री मंडलेकर जी ने इसे सुधार गृह के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता है - "कड़ाई के साथ करुणा"। नियमों के पालन में वे कठोर हैं, लेकिन बंदियों के साथ व्यवहार में बेहद मानवीय।
सुबह 6 बजे बैरक का निरीक्षण, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता जांच और बंदियों से सीधे संवाद करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। कई बार वे खुद बंदियों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते और उनका निराकरण करते नजर आए। उनका मानना है कि "जेल से निकलने वाला हर व्यक्ति समाज का उपयोगी नागरिक बने, यही असली सुधार है।"
इसी सोच के कारण जेल में साक्षरता कक्षाएं, व्यावसायिक प्रशिक्षण, योग और ध्यान शिविर शुरू करवाए गए। बंदियों को सिलाई, बढ़ईगीरी और कृषि से जुड़ा प्रशिक्षण दिलवाकर स्वावलंबी बनाने की दिशा में उन्होंने विशेष पहल की।vबंदियों के प्रति स्नेह: जेल के अंदर बना परिवार जैसा माहौल कर्मचारियों और बंदियों दोनों से बात करने पर एक बात बार-बार सुनने को मिलती है - "साहब डांटते भी हैं और अपनों की तरह हाल भी पूछते हैं।"
त्योहारों पर श्री मंडलेकर जी जेल में सांस्कृतिक कार्यक्रम कराते हैं। दीपावली पर दीप जलवाना, स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद बंदियों को संबोधित करना और अच्छे आचरण वाले बंदियों को सम्मानित करना उनकी परंपरा बन गई थी। महिला बैरक और किशोर बंदियों के लिए उन्होंने अलग से परामर्श व्यवस्था शुरू करवाई, ताकि मानसिक तनाव कम हो सके। एक बंदी के शब्दों में - "पहले जेल काटने की जगह लगती थी, अब लगता है कि गलती सुधारने का मौका है। साहब कहते हैं, बाहर जाकर मेहनत से कमाना, यही असली आजादी है।" सबसे बड़ी उपलब्धि: फरार कैदी को अतिशीघ्र पकड़वाना श्री मंडलेकर जी की कार्यकुशलता की सबसे बड़ी मिसाल तब देखने को मिली जब कुछ समय पहले जेल से एक बंदी फरार हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने पूरे अमले के साथ तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू करवाया। स्थानीय पुलिस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र का समन्वय कर उन्होंने महज कुछ ही घंटों में फरार बंदी को पकड़वा दिया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल विभाग की साख बची, बल्कि यह संदेश भी गया कि शाजापुर जेल में सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस ऑपरेशन की खुले तौर पर सराहना की थी।
इस घटना के बाद उन्होंने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया। रात की गश्त बढ़ाई, बैरकों की अचानक तलाशी और कर्मचारियों की ड्यूटी में पारदर्शिता लाई गई। सहकर्मियों और वरिष्ठों की राय
जेल स्टाफ का कहना है कि श्री मंडलेकर जी टीम वर्क में विश्वास रखते हैं। वे सिपाही से लेकर हेड वार्डन तक सबकी बात सुनते हैं। किसी की समस्या हो तो बिना संकोच मदद करते हैं। कारागार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "सुनील जी अनुशासनप्रिय होने के साथ-साथ नवाचार भी करते हैं। शाजापुर जेल में बंदियों के पुनर्वास के लिए जो मॉडल उन्होंने तैयार किया है, उसे दूसरे जिलों में भी लागू किया जा सकता है। पदोन्नति उनके परिश्रम का सम्मान है।"
नए दायित्व और भविष्य की योजना जेल अधीक्षक का पद संभालते ही श्री मंडलेकर जी ने तीन प्राथमिकताएं तय की हैं:
1. सुधार और पुनर्वास*: जेल के अंदर लघु उद्योग इकाइयां शुरू करना, ताकि रिहाई के बाद बंदियों को रोजगार मिल सके।
2. स्वास्थ्य और शिक्षा*: हर माह डॉक्टरों का शिविर, और 10वीं-12वीं की परीक्षा की तैयारी करवाने के लिए विशेष कक्षाएं।
3. डिजिटल और पारदर्शी जेल: आगंतुक मुलाकात और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना। उन्होंने कहा, "जेल की दीवारें ऊंची हो सकती हैं, लेकिन सोच बड़ी होनी चाहिए। मेरा प्रयास रहेगा कि शाजापुर जेल राज्य में सुधार कार्यों के लिए मॉडल बने।" समाज के लिए प्रेरणा श्री सुनील कुमार मंडलेकर जी की यह पदोन्नति केवल एक व्यक्ति की तरक्की नहीं है। यह उस सोच की जीत है जो मानती है कि दंड के साथ सुधार भी जरूरी है। उनका व्यवहार बताता है कि वर्दी के अंदर एक संवेदनशील इंसान भी धड़कता है। शाजापुर की जनता और कारागार विभाग को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में जिला जेल सुरक्षा, अनुशासन और मानवीयता - तीनों का संतुलन बनाकर रखेगा।
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